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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना
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श्लोक 50-51h
श्लोक
14.90.50-51h
सत्यं रतिश्च धर्मश्च स्वर्गश्च गुणनिर्जित:॥ ५०॥
स्त्रीणां पतिसमाधीनं कांक्षितं च द्विजर्षभ।
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! स्त्रियों के सत्य, धर्म, प्रेम, स्वर्ग आदि गुण तथा उनकी समस्त कामनाएँ उनके पति के अधीन हैं। 50 1/2॥
‘Dwijashrestha! Women's truth, religion, love, heaven mixed with their qualities and all their desires are under the control of their husband. 50 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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