श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 49-50h
 
 
श्लोक  14.90.49-50h 
इत्युक्ता सा तत: प्राह धर्मार्थौ नौ समौ द्विज॥ ४९॥
सक्तुप्रस्थचतुर्भागं गृहाणेमं प्रसीद मे।
 
 
अनुवाद
पति की यह बात सुनकर ब्राह्मणी बोली, 'ब्राह्मण! हम दोनों का धर्म और धन एक ही है, अतः आप मुझ पर प्रसन्न होकर मेरे हिस्से में से यह सवा किलो सत्तू ले लीजिए (और अतिथि को दे दीजिए)।'
 
On hearing this from her husband the Brahmin woman said, 'Brahmin! Both of us have the same religion and wealth, so please be pleased with me and take this quarter kilo of sattu from my share (and give it to the guest).
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas