श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  14.90.48-49h 
न वेत्ति कर्मतो भार्यारक्षणे योऽक्षम: पुमान्॥ ४८॥
अयशो महदाप्नोति नरकांश्चैव गच्छति।
 
 
अनुवाद
जो पुरुष स्त्री की रक्षा करना अपना कर्तव्य नहीं समझता अथवा जो स्त्री की रक्षा करने में असमर्थ है, वह इस लोक में महान अपयश प्राप्त करता है और परलोक में उसे नरक में गिरना पड़ता है।॥48 1/2॥
 
A man who does not consider it his duty to protect a woman or who is incapable of protecting a woman, incurs great infamy in this world and in the next world he has to fall into hell.'॥ 48 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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