श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  14.90.46 
अनुकम्प्यो नर: पत्न्या पुष्टो रक्षित एव च॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
जो पुरुष होकर भी स्त्री द्वारा धारण और रक्षित है, वह दया का पात्र है ॥46॥
 
A person who, despite being a man, is sustained and protected by a woman is worthy of pity. ॥ 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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