श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  14.90.42 
तस्य भार्याब्रवीद् वाक्यं मद्भागो दीयतामिति।
गच्छत्वेष यथाकामं परितुष्टो द्विजोत्तम:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
तब ब्राह्मण की पत्नी बोली, 'प्रभु! मेरा यह भाग इन्हें दे दीजिए, जिससे ये ब्राह्मण अपनी इच्छानुसार संतुष्ट होकर यहाँ से चले जाएँ।'
 
Then the Brahmin's wife said, 'Lord! Give this portion of mine to them, so that these Brahmins may be satisfied as per their wish and then go away from here.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)