श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  14.90.26-27h 
षष्ठे काले सदा विप्रो भुङ्‍क्ते तै: सह सुव्रत:।
षष्ठे काले कदाचित् तु तस्याहारो न विद्यते॥ २६॥
भुङ्‍क्तेऽन्यस्मिन् कदाचित् स षष्ठे काले द्विजोत्तम:।
 
 
अनुवाद
वे श्रेष्ठ व्रतधारी ब्राह्मण अपनी स्त्री और बालकों के साथ सदैव षष्ठी काल में अर्थात् प्रत्येक तीन दिन में भोजन करते थे। यदि किसी दिन उस समय भोजन उपलब्ध न हो, तो केवल द्वितीय षष्ठी काल आने पर ही वे ब्राह्मण भोजन करते थे॥26 1/2॥
 
Those excellent Brahmins who were fasting always used to take their meals with their wives and children in the sixth period i.e. every three days. If on some day food was not available at that time, then only when the second sixth period came, those Brahmins used to take their meals.॥ 26 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas