श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  14.90.25 
सभार्य: सह पुत्रेण सस्नुषस्तपसि स्थित:।
बभूव शुक्लवृत्त: स धर्मात्मा नियतेन्द्रिय:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वह अपनी पत्नी, पुत्र और पुत्रवधू के साथ रहकर तपस्या में लीन रहता था। ब्राह्मण देवता धर्मात्मा और शुद्ध आचरण और विचारों से जीवनयापन करने वाले जितेन्द्रिय थे। 25॥
 
He was engaged in penance while living with his wife, son and daughter-in-law. The Brahmin gods were religious souls and Jitendriyas who lived by pure conduct and thoughts. 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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