श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  14.90.23 
नकुल उवाच
हन्त वो वर्तयिष्यामि दानस्य फलमुत्तमम्।
न्यायलब्धस्य सूक्ष्मस्य विप्रदत्तस्य यद् द्विजा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
नकुल बोले, 'हे ब्राह्मणो! मैं तुमसे कुरुक्षेत्र में रहने वाले एक ब्राह्मण द्वारा न्यायपूर्वक अर्जित थोड़े से अन्नदान से प्राप्त हुए उत्तम फल के बारे में कह रहा हूँ।'
 
Nakul said, 'O Brahmins! I am telling you about the excellent results that I have seen from a little donation of food, earned justly, by a Brahmin who lived in Kurukshetra.' 23.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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