श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  14.90.22 
स्वर्गं येन द्विजा: प्राप्त: सभार्य: ससुतस्नुष:।
यथा चार्धं शरीरस्य ममेदं काञ्चनीकृतम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों! मैं यह घटना कह रहा हूँ कि उस दान के प्रभाव से उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने अपनी स्त्री, पुत्र और पुत्रवधू सहित किस प्रकार स्वर्ग पर अधिकार प्राप्त किया और वहाँ उन्होंने मेरे इस आधे शरीर को किस प्रकार सुवर्णमय बना दिया॥22॥
 
Brahmins! I am narrating the incident of how, by the effect of that donation, that great Brahmin along with his wife, son and daughter-in-law attained control over the heaven and how they turned this half of my body into golden gold there.'॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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