श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  14.90.20 
इत्यवश्यं मयैतद् वो वक्तव्यं द्विजसत्तमा:।
शृणुताव्यग्रमनस: शंसतो मे यथातथम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मणों! इसका कारण तुम्हें अवश्य बताने योग्य है। अब मैं जो कुछ भी यथार्थ रूप में तुमसे कहूँ, तुम सब उसे शान्त मन से सुनो।
 
O noble Brahmins! The reason for this is definitely worth telling to you. Now whatever I tell you in reality, you all should listen to it with a calm mind.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas