श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  14.90.18 
इति पृष्टो द्विजैस्तै: स प्रहसन् नकुलोऽब्रवीत्।
नैषा मृषा मया वाणी प्रोक्ता दर्पेण वा द्विजा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जब ब्राह्मणों ने उससे यह प्रश्न पूछा, तो नेवले ने हँसते हुए कहा, 'हे ब्राह्मणों! मैंने तुमसे कोई झूठ या अभिमानवश कुछ नहीं कहा।
 
When the Brahmins asked him this question, the mongoose laughed and said, 'O Brahmins! I have not told you anything false or out of pride.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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