श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  14.90.12 
पूजार्हा: पूजिताश्चात्र विधिवच्छास्त्रदर्शनात्।
मन्त्राहुतिहुतश्चाग्निर्दत्तं देयममत्सरम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
इसमें शास्त्रोक्त दृष्टि से पूज्य पुरुषों की विधिपूर्वक पूजा की गई है। मन्त्रों द्वारा अग्नि में आहुतियाँ दी गई हैं और दान योग्य वस्तुओं का बिना किसी ईर्ष्या के दान किया गया है॥12॥
 
‘In this, the persons worthy of worship from the scriptural point of view have been worshipped in a proper manner. Oblations have been offered in the fire by reciting mantras and the things that can be given have been donated without any jealousy.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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