श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 114-115h
 
 
श्लोक  14.90.114-115h 
ततो मयोक्तं तद् वाक्यं प्रहस्य ब्राह्मणर्षभा:॥ ११४॥
सक्तुप्रस्थेन यज्ञोऽयं सम्मितो नेति सर्वथा।
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मणों! इसीलिए मैंने हँसते हुए कहा था कि यह यज्ञ ब्राह्मण द्वारा दिए गए एक किलो चने के बराबर भी नहीं है। यह बात सच है। 114 1/2
 
O great Brahmins! That is why I had said laughingly that this sacrifice is not even equal to a kilo of gram flour offered by a Brahmin. This is indeed the case. 114 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)