श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  14.90.111 
तस्य सत्याभिसंधस्य सक्तुदानेन चैव ह।
शरीरार्धं च मे विप्रा: शातकुम्भमयं कृतम्॥ १११॥
 
 
अनुवाद
विप्रवरो! उस सत्यनिष्ठ ब्राह्मण के सत्तू दान से मेरा यह आधा शरीर भी सुवर्णमय हो गया है॥111॥
 
Vipravaro! This half of my body also became golden due to the donation of Sattu by that truthful Brahmin. 111॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)