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श्लोक 14.90.108-109h  |
तस्मिन् विप्रे गते स्वर्गं ससुते सस्नुषे तदा॥ १०८॥
भार्याचतुर्थे धर्मज्ञे ततोऽहं नि:सृतो बिलात्। |
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| अनुवाद |
| जब वह पुण्यात्मा ब्राह्मण अपनी पत्नी, पुत्र और पुत्रवधू सहित स्वर्ग को चले गये, तब मैं अपने बिल से बाहर आया। |
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| When that virtuous Brahmin along with his wife, son and daughter-in-law departed for heaven, I came out of my hole. |
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