श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 108-109h
 
 
श्लोक  14.90.108-109h 
तस्मिन् विप्रे गते स्वर्गं ससुते सस्नुषे तदा॥ १०८॥
भार्याचतुर्थे धर्मज्ञे ततोऽहं नि:सृतो बिलात्।
 
 
अनुवाद
जब वह पुण्यात्मा ब्राह्मण अपनी पत्नी, पुत्र और पुत्रवधू सहित स्वर्ग को चले गये, तब मैं अपने बिल से बाहर आया।
 
When that virtuous Brahmin along with his wife, son and daughter-in-law departed for heaven, I came out of my hole.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas