श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 107-108h
 
 
श्लोक  14.90.107-108h 
इत्युक्तवाक्ये धर्मे तु यानमारुह्य स द्विज:॥ १०७॥
सदार: ससुतश्चैव सस्नुषश्च दिवं गत:।
 
 
अनुवाद
धर्म की यह बात सुनकर उत्तम स्वभाव वाले ब्राह्मण देवता अपनी पत्नी, पुत्र और पुत्रवधू के साथ विमान पर सवार होकर स्वर्ग को चले गए ॥107 1/2॥
 
Upon hearing Dharma say this, the noble-natured Brahmin god along with his wife, son and daughter-in-law boarded the plane and went to heaven. ॥107 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)