श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  14.90.10 
किं बलं परमं तुभ्यं किं श्रुतं किं परायणम्।
कथं भवन्तं विद्याम यो नो यज्ञं विगर्हसे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
आपके पास कौन-सी शक्ति और कितना शास्त्रज्ञान है? आप किसके सहारे जीवित रहते हैं? हम आपको कैसे जान पाएँगे? आप कौन हैं, जो हमारे इस यज्ञ की निंदा करते हैं?॥10॥
 
‘What power and how much knowledge of scriptures do you possess? On whose support do you live? How will we get to know you? Who are you, who criticises this yagya of ours?॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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