श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 90: युधिष्ठिरके यज्ञमें एक नेवलेका उञ्छवृत्तिधारी ब्राह्मणके द्वारा किये गये सेरभर सत्तूदानकी महिमा उस अश्वमेधयज्ञसे भी बढ़कर बतलाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  14.90.1 
जनमेजय उवाच
पितामहस्य मे यज्ञे धर्मराजस्य धीमत:।
यदाश्चर्यमभूत् किंचित् तद् भवान् वक्तुमर्हति॥ १॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - ब्रह्मन्! मेरे पितामह बुद्धिमान धर्मराज युधिष्ठिर के यज्ञ में यदि कोई आश्चर्यजनक घटना घटी हो तो कृपया मुझे उसके विषय में बताइए। 1॥
 
Janamejaya asked – Brahman! If any surprising incident happened during the yagya of my great grandfather, the wise Dharmaraja Yudhishthira, please tell me about it. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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