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mahabharat 14.89.7-8h: इसके बाद युधिष्ठिर ने एक अनुष्ठान में सभी ब्राह्मणों को एक हजार करोड़ (एक खर्व) स्वर्ण मुद्राएँ दक्षिणा के रूप में दीं और व्यास को संपूर्ण पृथ्वी दान कर दी।   |   mahabharat अध्याय 14.89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  14.89.7-8h 
ततो युधिष्ठिर: प्रादाद् ब्राह्मणेभ्यो यथाविधि॥ ७॥
कोटी: सहस्रं निष्काणां व्यासाय तु वसुंधराम्।
 
 
अनुवाद
इसके बाद युधिष्ठिर ने एक अनुष्ठान में सभी ब्राह्मणों को एक हजार करोड़ (एक खर्व) स्वर्ण मुद्राएँ दक्षिणा के रूप में दीं और व्यास को संपूर्ण पृथ्वी दान कर दी।
 
After this Yudhishthira gave one thousand crore (one kharv) gold coins as dakshina to all the Brahmins in a ritual and donated the entire earth to Vyasa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)