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mahabharat 14.89.33: राजन! उस अनन्त धन को पृथ्वी में बाँटते समय कुन्तीकुमार युधिष्ठिर कुबेर के समान शोभायमान थे॥33॥   |   mahabharat अध्याय 14.89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  14.89.33 
तद् धनौघमपर्यन्तं पार्थ: पार्थिवमण्डले।
विसृजन् शुशुभे राजन् यथा वैश्रवणस्तथा॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस अनन्त धन को पृथ्वी में बाँटते समय कुन्तीकुमार युधिष्ठिर कुबेर के समान शोभायमान थे॥33॥
 
Rajan! While distributing that infinite amount of wealth in the earth, Kuntikumar Yudhishthir was as beautiful as Kubera. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)