श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  14.89.32 
राजभ्योऽपि तत: प्रादादृरत्नानि विविधानि च।
गजानश्वानलंकारान् स्त्रियो वासांसि काञ्चनम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पाण्डवों ने यज्ञ में आये हुए राजाओं को नाना प्रकार के रत्न, हाथी, घोड़े, आभूषण, स्त्रियाँ, वस्त्र और स्वर्ण भेंट किये।
 
Thereafter the Pandavas presented various kinds of gems, elephants, horses, ornaments, women, clothes and gold to the kings who had come to the sacrifice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)