श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  14.89.28 
स्वमंशं भगवान‍् व्यास: कुन्त्यै साक्षाद्धि मानत:।
प्रददौ तस्य महतो हिरण्यस्य महाद्युति:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
महाबली भगवान व्यास ने उस विशाल स्वर्ण-ढेर में से अपना भाग प्राप्त कर लिया था और उसे बड़े आदर के साथ कुन्ती को भेंट कर दिया था।
 
The mighty Lord Vyasa had received his share from that vast pile of gold and he presented it with great respect to Kunti. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)