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mahabharat 14.89.2-3h: राजन! तत्पश्चात पुरोहितों ने विधिपूर्वक अश्व की बलि दी और शास्त्रविधि के अनुसार मन्त्र, द्रव्य और श्रद्धा इन तीनों कलाओं से युक्त मनस्विनी द्रौपदी को उसके पास बिठाया।   |   mahabharat अध्याय 14.89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना  »  श्लोक 2-3h
 
 
श्लोक  14.89.2-3h 
तत: संश्रप्य तुरगं विधिवद् याजकास्तदा।
उपसंवेशयन् राजंस्ततस्तां द्रुपदात्मजाम्॥ २॥
कलाभिस्तिसृभी राजन् यथाविधि मनस्विनीम्।
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात पुरोहितों ने विधिपूर्वक अश्व की बलि दी और शास्त्रविधि के अनुसार मन्त्र, द्रव्य और श्रद्धा इन तीनों कलाओं से युक्त मनस्विनी द्रौपदी को उसके पास बिठाया।
 
Rajan! After that, the priests ritually offered the horse and made Manaswini Draupadi, equipped with the three arts of mantra, liquid and faith, sit near him as per the scriptures. 2 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)