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mahabharat 14.89.15-16h: भरत! उस समय आकाशवाणी हुई- ‘पाण्डवों! तुमने बहुत अच्छा निर्णय लिया है। धन्यवाद!’ इसी प्रकार पाण्डवों के सच्चे साहस की प्रशंसा करने वाले ब्राह्मण समूहों के स्वर भी वहाँ स्पष्ट सुनाई दे रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 14.89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 89: युधिष्ठिरका ब्राह्मणोंको दक्षिणा देना और राजाओंको भेंट देकर विदा करना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  14.89.15-16h 
ततोऽन्तरिक्षे वागासीत् साधु साध्विति भारत॥ १५॥
तथैव द्विजसंघानां शंसतां विबभौ स्वन:।
 
 
अनुवाद
भरत! उस समय आकाशवाणी हुई- ‘पाण्डवों! तुमने बहुत अच्छा निर्णय लिया है। धन्यवाद!’ इसी प्रकार पाण्डवों के सच्चे साहस की प्रशंसा करने वाले ब्राह्मण समूहों के स्वर भी वहाँ स्पष्ट सुनाई दे रहे थे।
 
Bharat! At that time a voice was heard from the sky- 'Pandavas! You have taken a very good decision. Thank you!' Similarly, the voices of the Brahmin groups praising the true courage of the Pandavas could also be clearly heard there. 15 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)