Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.85.4-6: कुरुनन्दन! वह दिन माघ मास के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि थी। उसमें पुष्य नक्षत्र का संयोग पाकर परम तेजस्वी पृथ्वीवासी धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने सभी भाइयों को बुलाया - भीमसेन, नकुल और सहदेव को और आक्रमणकारियों में श्रेष्ठ भीमसेन को संबोधित करते हुए, वक्ताओं और धर्मात्माओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर ने यह समयोचित बात कही - 4-6॥ | mahabharat अध्याय 14.85: यज्ञभूमिकी तैयारी, नाना देशोंसे आये हुए राजाओंका यज्ञकी सजावट और आयोजन देखना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुरुनन्दन! वह दिन माघ मास के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि थी। उसमें पुष्य नक्षत्र का संयोग पाकर परम तेजस्वी पृथ्वीवासी धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने सभी भाइयों को बुलाया - भीमसेन, नकुल और सहदेव को और आक्रमणकारियों में श्रेष्ठ भीमसेन को संबोधित करते हुए, वक्ताओं और धर्मात्माओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर ने यह समयोचित बात कही - 4-6॥
Kurunandan! That day was the twelfth day of Shuklapaksha of Magh month. Finding the combination of Pushya Nakshatra in it, the most brilliant Earthling Dharmaraja Yudhishthir called all his brothers - Bhimsen, Nakul and Sahadeva and addressing Bhimsen, the best of the attackers, Yudhishthir, the best of speakers and religious souls, said this timely thing - 4-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥