श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 85: यज्ञभूमिकी तैयारी, नाना देशोंसे आये हुए राजाओंका यज्ञकी सजावट और आयोजन देखना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  14.85.3 
विजयस्य च तत् कर्म गान्धारविषये तदा।
श्रुत्वा चान्येषु देशेषु स सुप्रीतोऽभवत् तदा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जब युधिष्ठिर ने गांधार राज्य तथा अन्य देशों में अर्जुन द्वारा किये गए अद्भुत पराक्रमों के बारे में सुना तो उनकी प्रसन्नता की सीमा नहीं रही।
 
Yudhishthira's joy knew no bounds when he heard about the wonderful feats displayed by Arjun in the kingdom of Gandhar and in other countries.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)