श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 85: यज्ञभूमिकी तैयारी, नाना देशोंसे आये हुए राजाओंका यज्ञकी सजावट और आयोजन देखना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  14.85.28 
ददृशुस्तं नृपतयो यज्ञस्य विधिमुत्तमम्।
देवेन्द्रस्येव विहितं भीमसेनेन भारत॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भारत! यज्ञ में भाग लेने आये हुए सभी राजागण भीमसेन द्वारा तैयार किये गये यज्ञ मण्डप की उत्कृष्ट निर्माण कला और सुन्दर सजावट को देखने लगे। वह मण्डप देवराज इन्द्र की यज्ञशाला के समान प्रतीत हो रहा था।
 
Bharat! The kings who had come to participate in the yajna started moving around and looking at the excellent construction art and beautiful decoration of the yajna mandap prepared by Bhimsena. That mandap looked like the yajna shala of Devraj Indra. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)