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mahabharat 14.83.9: जो वीर और साहसी पार्थ कभी भी युद्ध में किसी से पराजित नहीं होते थे, उन्होंने यज्ञ में विघ्न डालने आए एकलव्य कुमार को भी परास्त कर दिया॥9॥   |   mahabharat अध्याय 14.83: दक्षिण और पश्चिम समुद्रके तटवर्ती देशोंमें होते हुए अश्वका द्वारका, पञ्चनद एवं गान्धार देशमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 83: दक्षिण और पश्चिम समुद्रके तटवर्ती देशोंमें होते हुए अश्वका द्वारका, पञ्चनद एवं गान्धार देशमें प्रवेश  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  14.83.9 
ततस्तमपि कौन्तेय: समरेष्वपराजित:।
जिगाय युधि दुर्धर्षो यज्ञविघ्नार्थमागतम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जो वीर और साहसी पार्थ कभी भी युद्ध में किसी से पराजित नहीं होते थे, उन्होंने यज्ञ में विघ्न डालने आए एकलव्य कुमार को भी परास्त कर दिया॥9॥
 
The brave and courageous Partha, who was never defeated by anyone in battle, also defeated Eklavya Kumar, who had come to disrupt the yagya. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)