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mahabharat 14.83.4: राजन! शरभ द्वारा पूजित वह उत्तम अश्व काशी, कोसल, किरात और तंगण आदि जनपदों में गया॥4॥   |   mahabharat अध्याय 14.83: दक्षिण और पश्चिम समुद्रके तटवर्ती देशोंमें होते हुए अश्वका द्वारका, पञ्चनद एवं गान्धार देशमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 83: दक्षिण और पश्चिम समुद्रके तटवर्ती देशोंमें होते हुए अश्वका द्वारका, पञ्चनद एवं गान्धार देशमें प्रवेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  14.83.4 
ततोऽर्चितो ययौ राजंस्तदा स तुरगोत्तम:।
काशीनगान् कोसलांश्च किरातानथ तङ्गणान्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राजन! शरभ द्वारा पूजित वह उत्तम अश्व काशी, कोसल, किरात और तंगण आदि जनपदों में गया॥4॥
 
Rajan! That excellent horse, worshiped by Sharabha, went to the districts like Kashi, Kosal, Kirat and Tangan etc. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)