Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.81.31: हे पुरुषश्रेष्ठ! यह यज्ञ का घोड़ा अपनी इच्छा से ही चलता है (इसे कहीं रोकने का कोई नियम नहीं है); अतः आपका कल्याण हो। अब मैं चलता हूँ। इस समय मेरे ठहरने के लिए कोई स्थान नहीं है।॥31॥ | mahabharat अध्याय 14.81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे पुरुषश्रेष्ठ! यह यज्ञ का घोड़ा अपनी इच्छा से ही चलता है (इसे कहीं रोकने का कोई नियम नहीं है); अतः आपका कल्याण हो। अब मैं चलता हूँ। इस समय मेरे ठहरने के लिए कोई स्थान नहीं है।॥31॥
O best of men! This sacrificial horse moves according to its own will (there is no rule to stop it anywhere); hence may you be blessed. I shall go now. At present there is no place for me to stay.'॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥