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mahabharat 14.81.28: ‘प्रभु! हे विजयी योद्धाओं में श्रेष्ठ! यह भी आपका ही घर है। एक रात अपने घर में सुखपूर्वक रहकर आप कल प्रातःकाल पुनः घोड़े के पीछे चलेंगे।’॥28॥   |   mahabharat अध्याय 14.81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  14.81.28 
उषित्वेह निशामेकां सुखं स्वभवने प्रभो।
पुनरश्वानुगमनं कर्तासि जयतां वर॥ २८॥
 
 
अनुवाद
‘प्रभु! हे विजयी योद्धाओं में श्रेष्ठ! यह भी आपका ही घर है। एक रात अपने घर में सुखपूर्वक रहकर आप कल प्रातःकाल पुनः घोड़े के पीछे चलेंगे।’॥28॥
 
‘Prabhu! O best of the victorious warriors! This is also your house. After staying comfortably in your house for one night, you will again follow the horse tomorrow morning.'॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)