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mahabharat 14.81.25: अर्जुन के ऐसा कहने पर बुद्धिमान राजा बभ्रुवाहन ने नेत्रों में आँसू भरकर अपने पिता से इस प्रकार कहा-॥25॥   |   mahabharat अध्याय 14.81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 81: उलूपीका अर्जुनके पूछनेपर अपने आगमनका कारण एवं अर्जुनकी पराजयका रहस्य बताना, पुत्र और पत्नीसे विदा लेकर पार्थका पुन: अश्वके पीछे जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  14.81.25 
इत्येवमुक्त: पार्थेन स राजा बभ्रुवाहन:।
उवाच पितरं धीमानिदमस्राविलेक्षण:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के ऐसा कहने पर बुद्धिमान राजा बभ्रुवाहन ने नेत्रों में आँसू भरकर अपने पिता से इस प्रकार कहा-॥25॥
 
On Arjuna saying this, the wise king Babhruvahana, with tears in his eyes, said to his father thus – ॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)