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mahabharat 14.80.9: हे कुरु के प्रिय और मेरे जीवनदाता! उठो! महाबाहो! मैंने तुम्हारा घोड़ा मुक्त कर दिया है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  14.80.9 
उत्तिष्ठ कुरुमुख्यस्य प्रियमुख्य मम प्रिय।
अयमश्वो महाबाहो मया ते परिमोक्षित:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे कुरु के प्रिय और मेरे जीवनदाता! उठो! महाबाहो! मैंने तुम्हारा घोड़ा मुक्त कर दिया है॥9॥
 
Kuru's beloved and my life-giver! Get up. Mahabaho! I have freed your horse.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)