Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.80.7: नागकुमारी! मेरा पुत्र भी मरा पड़ा है, फिर भी मैं उसके लिए शोक नहीं कर रही हूँ। मैं तो केवल अपने पति के लिए शोक कर रही हूँ, जिनका मेरे यहाँ इतना आतिथ्य हुआ। ॥7॥ | mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नागकुमारी! मेरा पुत्र भी मरा पड़ा है, फिर भी मैं उसके लिए शोक नहीं कर रही हूँ। मैं तो केवल अपने पति के लिए शोक कर रही हूँ, जिनका मेरे यहाँ इतना आतिथ्य हुआ। ॥7॥
‘Naagkumari! My son is also lying dead, yet I do not grieve for him. I am grieving only for my husband, who was given such hospitality at my place.' ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥