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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना
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श्लोक 59
श्लोक
14.80.59
जननी च किमर्थं ते रणभूमिमुपागता।
नागेन्द्रदुहिता चेयमुलूपी किमिहागता॥ ५९॥
अनुवाद
तुम्हारी माता युद्धभूमि में क्यों आई है और यह नागराजकुमारी उलूपी भी यहाँ क्यों आई है?॥59॥
‘Why has your mother come to the battlefield? And why has this princess of the serpents, Ulupi, also come here?॥ 59॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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