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mahabharat 14.80.57: थोड़ी दूर पर बभ्रुवाहन की दुःखी माता चित्रांगदा उलूपी के साथ खड़ी थी। जब अर्जुन ने उसे देखा तो उसने बभ्रुवाहन से पूछा-॥57॥   |   mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  14.80.57 
ददर्श चापि दूरेऽस्य मातरं शोककर्शिताम्।
उलूप्या सह तिष्ठन्तीं ततोऽपृच्छद् धनंजय:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
थोड़ी दूर पर बभ्रुवाहन की दुःखी माता चित्रांगदा उलूपी के साथ खड़ी थी। जब अर्जुन ने उसे देखा तो उसने बभ्रुवाहन से पूछा-॥57॥
 
A little distance away, Babruvahana's grieving mother Chitrangada was standing with Ulupi. When Arjuna saw her, he asked Babruvahana -॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)