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mahabharat 14.80.54: प्रभु ! जब नरसिंह श्री अर्जुन पुनः उठे, तब स्वर्ग के राजा इन्द्र ने उन पर दिव्य एवं पवित्र पुष्पों की वर्षा की ॥54॥   |   mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  14.80.54 
उत्थिते पुरुषव्याघ्रे पुनर्लक्ष्मीवति प्रभो।
दिव्या: सुमनस: पुण्या ववृषे पाकशासन:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
प्रभु ! जब नरसिंह श्री अर्जुन पुनः उठे, तब स्वर्ग के राजा इन्द्र ने उन पर दिव्य एवं पवित्र पुष्पों की वर्षा की ॥54॥
 
Lord! When the male lion Shri Arjun got up again, the ruler of heaven Indra showered divine and sacred flowers on him. 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)