Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.80.49-50: प्रजानाथ! मैं यह दिव्य मणि लाया हूँ। यह युद्ध में मारे गए नागराजों को सदैव जीवित कर देती है। प्रभु! आप इसे ले जाकर अपने पिता की छाती पर रख दीजिए। तब आप पाण्डुपुत्र और कुन्तीपुत्र अर्जुन को पुनः जीवित होते हुए देखेंगे।॥49-50॥ | mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अयं तु मे मणिर्दिव्य: समानीतो विशाम्पते।
मृतान् मृतान् पन्नगेन्द्रान् यो जीवयति नित्यदा॥ ४९॥
एनमस्योरसि त्वं च स्थापयस्व पितु: प्रभो।
संजीवितं तदा पार्थं स त्वं द्रष्टासि पाण्डवम्॥ ५०॥
अनुवाद
प्रजानाथ! मैं यह दिव्य मणि लाया हूँ। यह युद्ध में मारे गए नागराजों को सदैव जीवित कर देती है। प्रभु! आप इसे ले जाकर अपने पिता की छाती पर रख दीजिए। तब आप पाण्डुपुत्र और कुन्तीपुत्र अर्जुन को पुनः जीवित होते हुए देखेंगे।॥49-50॥
Prajanaath! I have brought this divine gem. It always revives the kings of snakes who die in war. Prabhu! You take it and place it on your father's chest. Then you will see Arjuna, son of Pandu and son of Kunti, come back to life.'॥ 49-50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥