श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  14.80.48 
ऋषिरेष महानात्मा पुराण: शाश्वतोऽक्षर:।
नैनं शक्तो हि संग्रामे जेतुं शक्रोऽपि पुत्रक॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
ये महापुरुष प्राचीन ऋषि हैं, सनातन और अविनाशी हैं। बेटा! इन्हें युद्ध में इन्द्र भी नहीं हरा सकता॥48॥
 
‘These great men are ancient sages, eternal and indestructible. Son! Even Indra cannot defeat them in battle.॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)