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mahabharat 14.80.43: हे कुरुपुत्र! उस मणि को लेकर नागराज की राजकुमारी उलूपी ने सैनिकों के हृदय को प्रसन्न करने वाले वचन कहे-॥43॥   |   mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  14.80.43 
तं गृहीत्वा तु कौरव्य नागराजपते: सुता।
मन:प्रह्लादनीं वाचं सैनिकानामथाब्रवीत्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! उस मणि को लेकर नागराज की राजकुमारी उलूपी ने सैनिकों के हृदय को प्रसन्न करने वाले वचन कहे-॥43॥
 
O son of Kuru! Taking that gem, the princess of the serpent kingdom Ulupi spoke words that delighted the hearts of the soldiers -॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)