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mahabharat 14.80.40: हे मनुष्यों! ऐसा कहकर धनंजयपुत्र परम बुद्धिमान राजा बभ्रुवाहन ने पुनः जल पीया और मृत्युपर्यन्त उपवास का व्रत लेकर चुपचाप बैठ गए ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  14.80.40 
इत्येवमुक्त्वा नृपते धनंजयसुतो नृप:।
उपस्पृश्याभवत् तूष्णीं प्रायोपेतो महामति:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों! ऐसा कहकर धनंजयपुत्र परम बुद्धिमान राजा बभ्रुवाहन ने पुनः जल पीया और मृत्युपर्यन्त उपवास का व्रत लेकर चुपचाप बैठ गए ॥40॥
 
Lord of men! Having said this, the son of Dhananjay, the extremely intelligent king Babruvahana again sipped water and took a vow of fasting till death and sat down quietly. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)