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mahabharat 14.80.4: बहन! तुम आर्यधर्म को जानती हो और अपने पति परायण हो। किन्तु तुम्हारे दुष्कर्मों के कारण तुम्हारे पति युद्धभूमि में मृत पड़े हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  14.80.4 
ननु त्वमार्यधर्मज्ञा ननु चासि पतिव्रता।
यत्त्वत्कृतेऽयं पतित: पतिस्ते निहतो रणे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
बहन! तुम आर्यधर्म को जानती हो और अपने पति परायण हो। किन्तु तुम्हारे दुष्कर्मों के कारण तुम्हारे पति युद्धभूमि में मृत पड़े हैं।
 
Sister! You know the Aryadharma and are faithful to your husband. But because of your misdeeds, your husband is lying dead on the battlefield. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)