श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  14.80.36 
यदि नोत्तिष्ठति जय: पिता मे नरसत्तम:।
अस्मिन्नेव रणोद्देशे शोषयिष्ये कलेवरम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
यदि मेरे पिता, पुरुषोत्तम अर्जुन आज जीवित होकर पुनः खड़े न हो जाएँ, तो मैं इसी युद्धभूमि में उपवास करके अपना शरीर सुखा दूँगा॥ 36॥
 
If my father, the best of men, Arjuna, does not come alive today and stand up again, then I will dry up my body by fasting on this very battlefield.॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)