श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  14.80.34 
इत्युक्त्वा स ततो राजा दु:खशोकसमाहत:।
उपस्पृश्य महाराज दु:खाद् वचनमब्रवीत्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर राजा बभ्रुवाहन ने शोक और शोक से पीड़ित होकर जल से मुँह धोया और बड़े दुःख के साथ कहा:॥34॥
 
Having said this, King Babruvahana, afflicted with grief and sorrow, rinsed his mouth with water and said with great sorrow:॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)