श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  14.80.31 
पश्य नागोत्तमसुते भर्तारं निहतं मया।
कृतं प्रियं मया तेऽद्य निहत्य समरेऽर्जुनम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
नागराजराज्य! देखो, मैंने युद्ध में तुम्हारे स्वामी को मार डाला है। सम्भव है कि आज युद्धभूमि में इस प्रकार अर्जुन को मारकर मैंने वही किया हो जो तुम चाहते थे।॥31॥
 
Naagarajarajya! Look, I have killed your master in the war. It is possible that I have done what you wanted by killing Arjuna in this manner today in the battlefield. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)