Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.80.29-30: आज पिता की हत्या करके मेरे लिए बारह वर्ष तक कठोर व्रत करना अत्यन्त कठिन है। मुझ क्रूर पितृ-हत्यारे के लिए तो यही प्रायश्चित है कि मैं अपने पिता की खाल से अपना शरीर ढँक लूँ और उनका सिर और कपाल धारण करके बारह वर्ष तक घूमता रहूँ। पिता की हत्या करके मेरे लिए और कोई प्रायश्चित नहीं है।॥ 29-30॥ | mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आज पिता की हत्या करके मेरे लिए बारह वर्ष तक कठोर व्रत करना अत्यन्त कठिन है। मुझ क्रूर पितृ-हत्यारे के लिए तो यही प्रायश्चित है कि मैं अपने पिता की खाल से अपना शरीर ढँक लूँ और उनका सिर और कपाल धारण करके बारह वर्ष तक घूमता रहूँ। पिता की हत्या करके मेरे लिए और कोई प्रायश्चित नहीं है।॥ 29-30॥
‘It is very difficult for me to observe a strict fast for twelve years after killing my father today. The only atonement for me, a cruel father-killer, is to cover my body with his skin and roam around for twelve years wearing my father's head and skull. There is no other atonement for me after killing my father.॥ 29-30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥