श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  14.80.28 
व्यादिशन्तु च किं विप्रा: प्रायश्चित्तमिहाद्य मे।
सुनृशंसस्य पापस्य पितृहन्तू रणाजिरे॥ २८॥
 
 
अनुवाद
‘ब्राह्मणों! मैं अत्यन्त क्रूर और पापी हूँ और मैंने युद्धस्थल में अपने पिता को मार डाला है। अब मेरे लिए क्या प्रायश्चित है, बताओ?॥ 28॥
 
‘Brahmins! I am extremely cruel, sinful and have killed my father in the battlefield. Tell me, what atonement is there for me now?॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)