Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.80.23-24h: ‘मेरी माता चित्रांगदा देवी का दृढ़ हृदय अपने चौड़े वक्ष और विशाल भुजाओं वाले पति को मारा जाता हुआ देखकर भी नहीं टूटता। इससे मैं यह विश्वास करती हूँ कि मनुष्य का अन्त आए बिना मरना अत्यन्त कठिन है।॥23 1/2॥ | mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘मेरी माता चित्रांगदा देवी का दृढ़ हृदय अपने चौड़े वक्ष और विशाल भुजाओं वाले पति को मारा जाता हुआ देखकर भी नहीं टूटता। इससे मैं यह विश्वास करती हूँ कि मनुष्य का अन्त आए बिना मरना अत्यन्त कठिन है।॥23 1/2॥
‘The strong heart of my mother Chitrangada Devi does not break even after seeing her husband who had a broad chest and huge arms being killed. From this I believe that it is very difficult for a human being to die without the end coming.॥ 23 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥