Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.80.19: वैशम्पायनजी कहते हैं - 'हे जनमेजय! तत्पश्चात चित्रांगदा विलाप करती हुई और उनसे विमुख होकर दयनीय अवस्था में अपने पति के चरण पकड़कर बैठ गई और गहरी साँस लेती हुई अपने पुत्र की ओर भी देखने लगी॥19॥ | mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - 'हे जनमेजय! तत्पश्चात चित्रांगदा विलाप करती हुई और उनसे विमुख होकर दयनीय अवस्था में अपने पति के चरण पकड़कर बैठ गई और गहरी साँस लेती हुई अपने पुत्र की ओर भी देखने लगी॥19॥
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! Thereafter, Chitrangada, after wailing and turning away from him, sat down holding her husband's feet in a pitiable state and, taking deep breaths, started looking at her son as well.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥