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mahabharat 14.80.10: प्रभु! आपको तो महाराज युधिष्ठिर के अश्व के पीछे यज्ञ के लिए जाना है; फिर आप इस पृथ्वी पर कैसे सो रहे हैं?॥10॥   |   mahabharat अध्याय 14.80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 80: चित्रांगदाका विलाप, मूर्च्छासे जगनेपर बभ्रुवाहनका शोकोद्‍गार और उलूपीके प्रयत्नसे संजीवनीमणिके द्वारा अर्जुनका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  14.80.10 
ननु त्वया नाम विभो धर्मराजस्य यज्ञिय:।
अयमश्वोऽनुसर्तव्य: स शेषे किं महीतले॥ १०॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! आपको तो महाराज युधिष्ठिर के अश्व के पीछे यज्ञ के लिए जाना है; फिर आप इस पृथ्वी पर कैसे सो रहे हैं?॥10॥
 
Prabhu! You have to follow the horse of Maharaja Yudhishthira for the sacrificial ceremony; then how are you sleeping here on the earth?॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)